21वी सदी में भारत हिंदुत्व के नारों से नहीं हिन्दत्व की भावना से बनेगा पुनः विश्व धर्म गुरु….

अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ज्ञानानुसार सृष्टि में 84 लाख योनियों के जीव-जीवात्मा विचरण करते है जिनमे एक मानव ही ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति, सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी है, किन्तु कालदोष के कारण मानव अपनी श्रेष्ठता को भूल गया है| मानव हमारी जाति है मानवता है धर्म हमारा| धर्म के ठेकेदारों द्वारा पैदा किये गए भेदभाव को छोड़ो जन-जन से नाता जोड़ो|

ईश्वर, आत्मा और जीवात्मा तीनों निराकार है और साकार नश्वर मानव तन आपका सत्यस्वरूप नहीं है, नश्वर मानव तन आपके लिए एक रथ के समान है जिस पर आप जीवात्मस्वरूप में सवार होकर, कर्मभूमि पर आत्मकल्याण के लिए कर्म कर रहे है, आत्मा-जीवात्मा व मानव धर्म के लिए कोई जाति-सम्प्रदाय नही होता तो मानव के नश्वर तन के लिए जाति सम्प्रदाय का भेदभाव करना भला कैसे सार्थक हो सकता है? जबकि नश्वर मानव तन परिवर्तनशील है, जब तन परिवर्तन होता है तो उसके लिए कर्मभूमि पर सब कुछ बदल जाता है| अगर अपने भारत को पुनः विश्व धर्म गुरु बनाना है तो जाति-सम्प्रदायवाद के भेदभाव को छोडो जन जन से नाता जोड़ो|

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