अजन्मे अनामी एक ही ब्रह्म को धर्म-संप्रदाय व भाषानुसार अनेक नामों से पुकारा जाता है….

ईश्वर एक है इस बात को सब जानते-मानते है, किन्तु एक ही ईश्वर के दो स्वरूप, दो चरित्र है इस बात को कोई बिरला साधक ही जान पाता है| अजन्मे अनामी ब्रह्म को मानव जगत के लोगों ने अनेक नाम देकर धर्म के नाम पर अनेक जाति संप्रदाय बना दिए है, जिसके कारण मानव जगत के लोगों के बीच नफरतों की दीवारे खड़ी हो गई है, इन दीवारों को अद्भुत रहस्यमय सृष्टि सृजन का रहस्यमय ज्ञान ही गिरा सकता है| हम सब एक है, सबका स्वामी एक, भेदभाव को छोड़ो जन-जन से नाता जोड़ो आपका मानव जीवन सार्थक हो जायेगा| सत्कर्मी बनो सुखी रहो|

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