||कल्कि ज्ञान सागर के माध्यम से ईश्वरीय संदेश|| कर्मभूमि पर अनेक प्रकार के धार्मिक स्थल बन जाने से मनुष्य …
कल्कि ज्ञान सागर
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कल्कि ज्ञान सागर
सम्पूर्ण ब्रह्मांड की निष्कलंक, निराकार परम दिव्य महाशक्ति परमब्रह्म का कर्मभूमि पर अवतरण होता है जन्म-मरण नही…
||कल्कि ज्ञान सागर के माध्यम से ईश्वरीय संदेश|| निराकार परमब्रह्म कभी साकार प्रकट नहीं होता, वो अनादी, अजन्मा, अजर-अमर, अविनाशी, गुण-दोष …
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कल्कि ज्ञान सागर
मानव स्वयं ही स्वयं के कर्मो द्वारा स्वयं का रक्षक व भक्षक बनता है सत्कर्मी मनुष्य को सुखी जीवन और तामसिक कर्म से त्रासदियां मिलती है….
||कल्कि ज्ञान सागर के माध्यम से ईश्वरीय संदेश|| मानव स्वयं …
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कल्कि ज्ञान सागर
युगानुसार होने वाले अवतारों के रूप अनेक हो सकते है किन्तु सभी अवतारो के हृदय में ज्ञानस्वरूप अवतरण सिर्फ एक अजन्मे परमब्रह्म का ही होता है|
||कल्कि ज्ञान सागर के माध्यम से निष्कलंक निराकार अजन्में ईश्वर का संदेश| कर्मभूमि पर युगानुसार होने वाले अवतार को अलग-अलग …
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कल्कि ज्ञान सागर
अगर आप चाहते है की सब लोग आपका सम्मान करे और आपको प्यार करे तो पहले इसकी शुरुआत आपको स्वयं से करनी होगी….
||कल्कि ज्ञान सागर के माध्यम से ईश्वरीय संदेश|| अगर …
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कल्कि ज्ञान सागर
ईश्वर किसी का भाग्य विधाता नहीं है कर्मयोगी स्वयं ही स्वयं के भाग्य का विधाता है…..
||कल्कि ज्ञान सागर के माध्यम से ईश्वरीय संदेश|| ईश्वर किसी का भाग्य विधाता नहीं है कर्मयोगी स्वयं ही स्वयं के …
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कल्कि ज्ञान सागर
गंगा को अपवित्र करना बहुत बड़ा पाप है, मूर्तियों की पूजा करने वालो का मानव जीवन कभी सार्थक नहीं हो सकता….
||कल्कि ज्ञान सागर के माध्यम से ईश्वरीय संदेश || युग परिवर्तन की संधिवेला संगम युग में कलयुग को सतयुग में परिणित …
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कल्कि ज्ञान सागर
सदियों पहले मानव जगत के पूर्वजो ने अज्ञानतावश कर दी सबसे बड़ी भूल उस भूल की सजा आज का सम्पूर्ण मानव जगत भुगत रहा है|
सदियों पहले मानव जगत ने अज्ञानतावश कर दी सबसे बड़ी भूल सृष्टि के रचियता अपने परम माता-पिता को परमात्मा और हृदयस्त …
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कल्कि ज्ञान सागर
ईश्वर ने मानव को सारे विकास धरती को स्वर्ग बनाने के लिए दिये है धरती पर मानव का नामों निशान मिटाने के लिए नहीं…….
ईश्वर ने मानव को कर्मभूमि पर आत्मकल्याण करने के लिए जन्म दिया है, कर्मभूमि का मालिक बनने …
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कल्कि ज्ञान सागर
मानव निर्गुण ईश्वर का सगुण स्वरूप है, सगुण जीवात्मस्वरूप में मानव भिन्न-भिन्न हो सकते है, निर्गुण आत्मस्वरूपता में सभी एक समान है |
अद्धभूत रहस्यमय सृष्टि सृजन के रहस्यमय ज्ञानानुसार जब कुछ भी नहीं था तब भी अनादी काल से एक निराकार, अजर-अमर, अविनाशी, …
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